Gupt Navratri 2026: गुप्त नवरात्र आज से शुरू साधना, सिद्धि और शक्ति जागरण का विशेष काल
Gupt Navratri 2026 News: माघ मास के शुक्ल पक्ष के साथ ही आज से गुप्त नवरात्र का पावन पर्व आरंभ हो गया है। यह नवरात्र उत्तराषाढ़ा नक्षत्र और सर्वार्थ अमृत सिद्धि योग में शुरू हो रहा है, जिसे साधना और सिद्धि के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। यह विशेष पर्व 28 जनवरी को विजयादशमी के साथ संपन्न होगा।

सामान्य नवरात्र के विपरीत, गुप्त नवरात्र में सार्वजनिक आयोजन नहीं होते। यह पर्व आंतरिक साधना, तंत्र उपासना और आत्मिक उन्नति के लिए जाना जाता है, इसलिए इसे “गुप्त” नवरात्र कहा जाता है।
गुप्त नवरात्र का महत्व
गुप्त नवरात्र का उद्देश्य बाहरी आडंबर से दूर रहकर अंतरात्मा में शक्ति का जागरण करना होता है।
इस दौरान श्रद्धालु—
- कलश स्थापना कर मां शक्ति का आह्वान करते हैं
- निराहार, फलाहार या एक समय भोजन कर व्रत रखते हैं
- मौन, ब्रह्मचर्य और संयम का पालन करते हैं
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह समय तंत्र साधना और मंत्र सिद्धि के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।
दस महाविद्याओं की विशेष साधना
माघ गुप्त नवरात्र में दस महाविद्याओं की उपासना का विशेष महत्व है, जिन्हें शक्ति के विविध स्वरूप माना गया है—
- मां काली
- तारा देवी
- त्रिपुर सुंदरी
- भुवनेश्वरी
- छिन्नमस्ता
- त्रिपुर भैरवी
- धूमावती
- बगलामुखी
- मातंगी
- कमला
साधक अपनी मनोकामना और साधना मार्ग के अनुसार एक या अधिक महाविद्याओं की आराधना करते हैं।
गुप्त नवरात्र की पूजा विधि
गुप्त नवरात्र की पूजा विधि सामान्य नवरात्र से अधिक अनुशासित और गहन मानी जाती है—
- प्रातः स्नान के बाद स्वच्छ स्थान पर देवी की प्रतिमा/चित्र स्थापित करें
- दीप प्रज्वलित कर मंत्र जप और ध्यान करें
- दुर्गा सप्तशती पाठ, दुर्गा कवच और शतनाम पाठ विशेष फलदायी माने गए हैं
- नियमित जाप से रोग-शोक से मुक्ति, मानसिक शांति और आत्मबल में वृद्धि होती है
क्यों विशेष है गुप्त नवरात्र?
धार्मिक मान्यता है कि इस काल में की गई साधना शीघ्र फल देती है।
इससे—
- व्यवसाय में उन्नति
- रोजगार के अवसर
- पारिवारिक सुख
- स्वास्थ्य लाभ
- आध्यात्मिक प्रगति
जैसे अनेक शुभ फल प्राप्त होते हैं। इसी कारण गुप्त नवरात्र को केवल पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और शक्ति साधना का दुर्लभ अवसर माना जाता है।
