Mobile Number Validation: (MNV) क्या है? अब बैंक और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर क्यों होगी इसकी जरूरत? जानें पूरा अपडेट
Mobile Number Validation: देश में साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए दूरसंचार विभाग (DoT) ने टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी (TCS) रूल्स 2024 में बड़े बदलाव किए हैं। इन संशोधनों में सबसे अहम है मोबाइल नंबर वैलिडेशन (Mobile Number Validation – MNV), जिसे अब बैंक, डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन सेवाओं में अनिवार्य किया जा सकता है।

मोबाइल नंबर वैलिडेशन (MNV) क्या है?
MNV एक ऐसा सिस्टम है, जिसके जरिए यह सत्यापित किया जाएगा कि जिस व्यक्ति का मोबाइल नंबर है, वही उसे इस्तेमाल कर रहा है। अब बैंक या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स उपयोगकर्ता से उसके मोबाइल नंबर की वैलिडेशन यानी पहचान की पुष्टि करने को कह सकते हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी मोबाइल नंबर दूसरे व्यक्ति की पहचान का दुरुपयोग करके अकाउंट न खोल सके।
MNV की जरूरत क्यों पड़ी?
रिपोर्टों के अनुसार, अभी कई प्लेटफॉर्म्स पर यह सत्यापित करने का कोई पक्का तरीका नहीं है कि ग्राहक जो मोबाइल नंबर दे रहा है, वह वास्तव में उसी का है।
उदाहरण:
- कोई भी व्यक्ति अपने परिवार के किसी भी सदस्य के मोबाइल नंबर से Amazon या Flipkart पर अकाउंट बना सकता है।
- साइबर अपराधी कई बार दूसरों के मोबाइल नंबर का इस्तेमाल करके फर्जी अकाउंट तैयार करते हैं।
- पहचान चोरी (Identity Theft) और वित्तीय धोखाधड़ी के कई मामले सामने आ चुके हैं।
बैंकों ने इस समस्या को कम किया है, लेकिन उनके पास भी मोबाइल नंबर की मालिकाना पुष्टि करने का आधिकारिक साधन नहीं था।
MNV लागू होने से क्या बदलेगा?
- बैंक, ई-कॉमर्स कंपनियां और डिजिटल प्लेटफॉर्म अब मोबाइल नंबर के वास्तविक मालिक की पहचान कर पाएंगे।
- फर्जी अकाउंट, धोखाधड़ी और पहचान चोरी के मामले कम होंगे।
- डिजिटल लेनदेन और ऑनलाइन गतिविधियों में उपभोक्ता का भरोसा बढ़ेगा।
हालांकि कुछ विशेषज्ञ इससे प्राइवेसी को खतरे की आशंका भी जता रहे हैं। उनका कहना है कि ग्राहकों की जानकारी का दुरुपयोग न हो, इसकी कड़ी निगरानी जरूरी है। DoT का कहना है कि MNV को प्राइवेसी-सुरक्षित मॉडल में लागू किया जाएगा।
रीसेल डिवाइस स्क्रबिंग: सेकंड हैंड फोन खरीदने वालों के लिए राहत
MNV के साथ साथ DoT ने रीसेल डिवाइस स्क्रबिंग नियम भी लागू किया है।
अब:
- सेकंड-हैंड मोबाइल बेचने वालों को फोन के IMEI नंबर की जांच करनी होगी।
- इससे पता लगेगा कि फोन चोरी का है या ब्लैकलिस्टेड।
इससे बाजार में चोरी किए गए मोबाइल की बिक्री लगभग पूरी तरह रुक जाएगी।
TIUE सिस्टम भी लागू
टेलीकॉम आइडेंटिफायर यूजर एंटिटी (TIUE) के तहत:
- बैंक, ई-कॉमर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म भी जरूरत पड़ने पर यूज़र की पहचान से जुड़ी जानकारी सरकार को दे सकेंगे।
- इससे साइबर अपराध और धोखाधड़ी के मामलों को सुलझाने में आसानी होगी।
यह बदलाव क्यों महत्वपूर्ण है?
- डिजिटल इंडिया के दौर में साइबर सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती है।
- MNV, डिवाइस स्क्रबिंग और TIUE जैसे बदलाव भारतीय डिजिटल सिस्टम को ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बनाएंगे।
