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श्रम शक्ति नीति 2025, श्रमिकों को मिलेगा समान वेतन, सुरक्षित कार्यस्थल और सामाजिक सुरक्षा

श्रम शक्ति नीति 2025: देश के करोड़ों श्रमिकों के लिए केंद्र सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय (Ministry of Labour and Employment) जल्द ही “श्रम शक्ति नीति 2025” (National Labour Policy 2025) लागू करने जा रहा है। यह नीति देश के श्रमिकों के वेतन, कार्यस्थल, सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मानकों को एकीकृत करने का काम करेगी।

श्रम शक्ति नीति 2025


एकीकृत दिशा देने का उद्देश्य

मंत्रालय के अनुसार अब तक देश में श्रमिक क्षेत्र के लिए कोई एकीकृत नीति नहीं थी। कंपनियां और संस्थान अलग-अलग कानूनों और नियमों के तहत श्रमिकों के हित में काम करती थीं, लेकिन कोई समान मानक तय नहीं था। अब श्रम शक्ति नीति 2025 एक विजन डॉक्यूमेंट के रूप में काम करेगी, जो न केवल संगठित बल्कि असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए भी मार्गदर्शक नीति बनेगी।

नीति के प्रमुख उद्देश्य

श्रम शक्ति नीति 2025 के तहत केंद्र सरकार ने कुछ मुख्य लक्ष्य तय किए हैं—

  1. समान वेतन — योग्यता और अनुभव के आधार पर सभी श्रमिकों को समान वेतन देना।
  2. बेहतर कार्यस्थल — सुरक्षा, स्वच्छता और चिकित्सा जैसी सुविधाएं अनिवार्य बनाना।
  3. सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा (Universal Social Security) — हर श्रमिक को बुनियादी सुरक्षा और भविष्य की गारंटी देना।
  4. महिलाओं और युवाओं का सशक्तिकरण — समान अवसर और नेतृत्व में भागीदारी बढ़ाना।
  5. श्रमिकों की भागीदारी — नीति निर्माण में श्रमिकों के सुझावों को शामिल करना।
  6. अतिरिक्त कार्य का सम्मानजनक भुगतान — सहमति के आधार पर ओवरटाइम और उचित वेतन का प्रावधान।

बदलेंगे कार्यस्थलों के मानक

मंत्रालय का मानना है कि श्रम शक्ति नीति 2025 आने वाले समय में भारत की वर्क कल्चर को नई दिशा देगी। यह नीति कार्यस्थलों पर मानवीय और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करेगी तथा श्रमिकों को केवल रोजगार नहीं बल्कि सम्मानजनक जीवन प्रदान करेगी।

राज्यों को भी अपनाने की सलाह

केंद्र सरकार नीति के मसौदे पर हितधारकों से सुझाव प्राप्त करने के बाद इसे अंतिम रूप देगी। इसके बाद सभी राज्य सरकारों को नीति अपनाने की सलाह दी जाएगी, ताकि पूरे देश में एक समान श्रमिक कल्याण ढांचा तैयार हो सके।

क्यों जरूरी है श्रम शक्ति नीति 2025

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह नीति केवल रोजगार सृजन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य है—

“हर श्रमिक को सुरक्षित, सम्मानजनक और समान अवसर वाला कार्य वातावरण प्रदान करना।”

इससे न केवल उत्पादकता बढ़ेगी बल्कि भारत का श्रम क्षेत्र समावेशी विकास में भी बड़ी भूमिका निभाएगा।

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