Shardiya Navratri 2025: नवरात्रि में कन्या पूजन का महत्व और इसकी आध्यात्मिक परंपरा
Shardiya Navratri 2025:
नवरात्रि का पावन पर्व देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना का समय होता है। इस दौरान अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन की विशेष परंपरा निभाई जाती है। नौ कन्याओं और एक छोटे बालक को भोजन कराकर और उनकी पूजा करके मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। माना जाता है कि यह नौ कन्याएं देवी दुर्गा के नौ रूपों का प्रतीक होती हैं और इनके पूजन से घर में सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।

कन्या पूजन का आध्यात्मिक महत्व
कन्या पूजन केवल धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि इसका गहरा आध्यात्मिक अर्थ है।
- यह हमें सहजता, निर्मलता और दिव्यता को जीवन में उतारने का संदेश देता है।
- कन्याओं की पूजा इस बात का प्रतीक है कि हर जीव और हर व्यक्ति में दैवीय शक्ति और विशेष गुण मौजूद होते हैं।
- यह हमें प्रेरित करता है कि हम अपने भीतर छिपे गुण, साहस और सकारात्मक सोच को पहचानें और जीवन में उतारें।
अंदर की दैवी शक्ति को जागृत करना क्यों ज़रूरी?
नवरात्रि हमें यह सिखाती है कि हमारे भीतर मौजूद नकारात्मकता, गलत आदतें और कमजोरियां हमारी प्रगति में बाधा हैं।
- नवरात्र का पर्व इन्हें पहचानने और दूर करने का अवसर देता है।
- जब हम अपनी आत्मिक शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा को जगाते हैं, तो जीवन में सफलता, शांति और विकास प्राप्त होता है।
अष्ट शक्तियों का प्रतीक
मां दुर्गा को अष्टभुजाधारी कहा जाता है। यह उनकी आठ भुजाएं हमारे भीतर मौजूद आठ शक्तियों का प्रतिनिधित्व करती हैं, जैसे:
- सहनशीलता
- सही निर्णय लेने की क्षमता
- सहयोग का भाव
- साहस
- परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति
- धैर्य
- विवेक
- आत्मविश्वास
जब हम इन गुणों को अपनाते हैं, तो हमारी आत्मा सशक्त और दिव्य बन जाती है।
नवरात्रि के नौ दिन का संदेश
नवरात्रि के नौ दिन अज्ञानता से जागरूकता की ओर बढ़ने का समय माने जाते हैं। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि:
- सच्ची शक्ति हमारे भीतर है।
- हमें अपनी कमजोरियों को हराकर शांति, सहनशीलता और सकारात्मकता को अपनाना चाहिए।
- कन्या पूजन इस प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा है, जो हमें अपने जीवन में दैवीय गुणों को उतारने की प्रेरणा देता है।
