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Meenakshi Hooda: तानों से लेकर वर्ल्ड बॉक्सिंग चैम्पियन बनने तक का सफर

Meenakshi Hooda:

भारत की बेटी मीनाक्षी हुड्डा ने वर्ल्ड बॉक्सिंग चैम्पियनशिप 2025 में इतिहास रच दिया है। इंग्लैंड के लिवरपूल में हुई इस प्रतियोगिता में उन्होंने महिला 48 किलो भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया। यह जीत केवल एक मेडल नहीं, बल्कि संघर्ष, जिद और हौसले की कहानी है।

Meenakshi Hooda

हरियाणा के रुड़की गांव की रहने वाली मीनाक्षी का बचपन बेहद कठिन परिस्थितियों में बीता। पिता श्रीकृष्ण तीन दशक से किराए का ऑटो चलाते हैं और घर में टीवी तक नहीं था। लेकिन उन्होंने बेटी के सपनों को टूटने नहीं दिया। कभी उधार के ग्लव्स पहनकर रिंग में उतरी मीनाक्षी आज वर्ल्ड चैम्पियन हैं।

चैंपियनशिप में मीनाक्षी ने कजाखस्तान की पेरिस ओलंपिक ब्रॉन्ज मेडलिस्ट नाजिम काइजेबे को 4-1 से हराकर गोल्ड अपने नाम किया। वहीं, साथी बॉक्सर जैस्मिन लेंबोरिया ने भी 57 किलो वर्ग में स्वर्ण जीतकर भारत को गौरवान्वित किया।

मीनाक्षी के संघर्ष का सबसे अहम हिस्सा था सामाजिक ताने। पड़ोसी और गांव के लोग कहते थे कि चोट लग जाएगी और शादी नहीं होगी। लेकिन पिता के अटूट समर्थन और अपनी मेहनत से मीनाक्षी ने इन धारणाओं को तोड़ दिया। अब वही गांव बॉक्सिंग का हब बन चुका है, जहां 60-70 लड़कियां रोज प्रैक्टिस करती हैं।

अपनी जीत पर मीनाक्षी कहती हैं, “मुझे खुद पर भरोसा था। यह मेरी पहली वर्ल्ड चैंपियनशिप थी और लक्ष्य सिर्फ गोल्ड जीतना था। लोग क्या कहते हैं, ये मायने नहीं रखता। असली जीत खुद से हार न मानने में है।”

मीनाक्षी हुड्डा की इस जीत ने साबित कर दिया है कि कठिनाइयाँ चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, विश्वास और मेहनत से हर सपना पूरा किया जा सकता है।

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