Featuredछत्तीसगढ़

CG Khappar Yatra 2026: कवर्धा में 150 साल पुरानी खप्पर यात्रा आज, CCTV और ड्रोन से होगी निगरानी

CG Khappar Yatra: छत्तीसगढ़ के कवर्धा में करीब 150 साल पुरानी ऐतिहासिक खप्पर यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है। शारदीय नवरात्रि के अवसर पर 19 और 20 अक्टूबर की मध्यरात्रि को यह पारंपरिक यात्रा निकाली जाएगी। मां दंतेश्वरी, मां चंडी और मां परमेश्वरी मंदिर से निकलने वाली इस यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पुलिस और प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए हैं। यात्रा मार्ग पर CCTV और ड्रोन कैमरों से निगरानी की जाएगी।

CG Khappar Yatra 2026


CG Khappar Yatra: तीन देवी मंदिरों से निकलेगा खप्पर

कवर्धा की खप्पर यात्रा लंबे समय से चली आ रही धार्मिक परंपरा का हिस्सा है। मान्यता के अनुसार, महाअष्टमी की मध्यरात्रि को तीनों देवी मंदिरों से खप्पर निकाला जाता है। इस दौरान पुजारी एक हाथ में तलवार और दूसरे हाथ में अग्नि से युक्त खप्पर लेकर नगर भ्रमण करते हैं।

धार्मिक मान्यताओं में खप्पर को देवी शक्ति का प्रतीक माना जाता है। मंत्रोच्चार और पारंपरिक अनुष्ठानों के बीच श्रद्धालु माता के दर्शन करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि, शांति तथा नगर की खुशहाली की कामना करते हैं।

खप्पर यात्रा के लिए पुलिस की विशेष तैयारी

खप्पर यात्रा में संभावित भीड़ को देखते हुए पुलिस-प्रशासन ने सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए हैं। यात्रा मार्ग पर CCTV कैमरों और ड्रोन के जरिए निगरानी रखी जाएगी। इसके अलावा, प्रमुख चौक-चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर पुलिस बल तैनात रहेगा।

प्रशासन का उद्देश्य यात्रा को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराना और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए भीड़ प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

इन प्रमुख रास्तों से गुजरेगी कवर्धा की खप्पर यात्रा

खप्पर यात्रा अपने पारंपरिक मार्ग से होकर नगर भ्रमण करेगी। यात्रा मार्ग में पाली पारा, ठाकुर पारा, ऋषभदेव चौक, जयस्तंभ चौक, आंबेडकर चौक, मां महामाया मंदिर, भोजली तालाब, रानी दुर्गावती चौक, राजमहल चौक, शीतला चौक, करपात्री चौक और कचहरी पारा सहित कई प्रमुख स्थान शामिल हैं।

नगर भ्रमण के दौरान जगह-जगह श्रद्धालु खप्पर के दर्शन करेंगे और माता के जयकारे लगाएंगे। परंपरा के अनुसार, यात्रा अंत में मंदिर परिसर पहुंचकर संपन्न होगी।

150 साल पुरानी परंपरा, कवर्धा की धार्मिक पहचान

कवर्धा की खप्पर यात्रा को क्षेत्र की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान माना जाता है। रियासतकाल से चली आ रही इस परंपरा में हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं। नवरात्रि के दौरान होने वाला यह आयोजन आस्था, लोकपरंपरा और सामुदायिक सहभागिता का अनूठा उदाहरण है।

इस यात्रा को देखने और माता का आशीर्वाद लेने के लिए आसपास के क्षेत्रों के साथ-साथ दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालुओं के पहुंचने की जानकारी दी गई है। धार्मिक उत्साह के बीच प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था इस आयोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *