AI Driverless Car: मंगलुरु के छात्रों ने बनाई AI-पावर्ड ड्राइवरलेस इलेक्ट्रिक कार, खुद पहचानती है रास्ता
AI Driverless Car: भारत में ऑटोनॉमस व्हीकल टेक्नोलॉजी की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। कर्नाटक के मंगलुरु स्थित श्रीनिवास यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (SUIET) के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के छात्रों और फैकल्टी ने मिलकर बेहद कम लागत में AI-पावर्ड ड्राइवरलेस इलेक्ट्रिक कार ‘श्री-वाहन’ विकसित की है। इस स्मार्ट इलेक्ट्रिक वाहन को 23 जुलाई 2026 को आधिकारिक रूप से प्रस्तुत किया गया।

यह प्रोजेक्ट केवल एक शैक्षणिक मॉडल नहीं, बल्कि पूरी तरह कार्यशील प्रोटोटाइप है, जिसे भविष्य में वास्तविक उपयोग के लिए और विकसित किया जा सकता है।
सिर्फ 6 महीने में तैयार हुआ ‘श्री-वाहन’
टीम ने किसी नई कार को बनाने के बजाय एक मौजूदा वाहन को मॉडिफाई कर उसे इलेक्ट्रिक और AI-आधारित सेल्फ-ड्राइविंग कार में बदला। इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में लगभग 6 महीने का समय लगा, जबकि इसकी कुल लागत करीब 4 से 5 लाख रुपये रही।
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AI और सेंसर की मदद से खुद पहचानती है रास्ता
‘श्री-वाहन’ में कई आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया है, जिनमें शामिल हैं—
- LiDAR सेंसर
- AI आधारित विजन सिस्टम
- GPS नेविगेशन
- कैमरा बेस्ड विजन
- Ultrasonic Sensors
- Visual SLAM
- Sensor Fusion Technology
- Odometry
इन सभी तकनीकों की मदद से यह वाहन पहले से निर्धारित मार्ग पर बिना ड्राइवर के सुरक्षित रूप से चल सकता है। यदि रास्ते में कोई व्यक्ति, वाहन या अन्य बाधा आती है तो सेंसर तुरंत उसे पहचान लेते हैं और कार अपने-आप रुक जाती है। आवश्यकता पड़ने पर ऑपरेटर इसे कैमरे के जरिए मॉनिटर कर सकते हैं और रिमोट कंट्रोल से संचालित भी कर सकते हैं।
AI Assistant और स्मार्ट सेफ्टी फीचर्स
इस इलेक्ट्रिक कार में AI Assistant भी दिया गया है, जो वाहन की विभिन्न गतिविधियों को नियंत्रित करने में मदद करता है। सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए ऑटोनॉमस मोड में इसकी अधिकतम स्पीड 5 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है। वहीं मैनुअल मोड में यह वाहन 20 से 28 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चल सकता है।
800 नहीं, 5kWh बैटरी और 22KM तक की रेंज
‘श्री-वाहन’ में 5kWh लिथियम-आयन बैटरी पैक लगाया गया है। एक बार फुल चार्ज होने पर यह वाहन लगभग 15 से 22 किलोमीटर तक चल सकता है। इसके अलावा वाहन करीब 360 किलोग्राम तक का भार उठा सकता है, जिससे इसमें छह लोग सफर कर सकते हैं या सामान ढोया जा सकता है।
एम्बुलेंस से लेकर सेना तक कई क्षेत्रों में होगा उपयोग
इस AI आधारित इलेक्ट्रिक वाहन को कई उपयोगों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जिनमें शामिल हैं—
- शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों का परिवहन
- अस्पतालों में मरीजों की आवाजाही
- इंडस्ट्रियल कैंपस ट्रांसपोर्ट
- आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा
- सैन्य क्षेत्रों में सप्लाई
- डिफेंस ऑपरेशन में रिमोट कंट्रोल वाहन
अगला लक्ष्य- बिना मैप के खुद चलेगी कार
फिलहाल यह वाहन केवल पहले से मैप किए गए रास्तों पर ही चल सकता है। आने वाले समय में टीम इसमें Unmapped Roads Navigation, अधिक क्षमता वाली बैटरी और उन्नत ऑटोनॉमस ड्राइविंग फीचर्स जोड़ने पर काम करेगी। संस्थान का उद्देश्य भारतीय सड़कों के अनुरूप कम लागत वाली सेल्फ-ड्राइविंग टेक्नोलॉजी विकसित करना और भविष्य में इसका व्यावसायिक उपयोग संभव बनाना है।
छात्रों के लिए सीखने का बड़ा अवसर
इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर विश्वास सी. शेट्टी ने किया, जबकि विशाख मेनन ने रिसर्च एवं डेवलपमेंट की जिम्मेदारी संभाली। इसमें श्रेयस, अद्वितीय, उज्ज्वल, अक्षय, मंजूनाथ और प्रख्यात सहित कई छात्रों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।
विश्वविद्यालय के चांसलर डॉ. ए. श्रीनिवास राव ने कहा कि इस प्रकार के रिसर्च प्रोजेक्ट छात्रों को भविष्य की तकनीकों के लिए तैयार करते हैं और देश की वास्तविक समस्याओं के समाधान खोजने में मदद करते हैं।
