धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुंडिचा मंदिर को भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर माना जाता है। रथ यात्रा के दौरान भगवान यहाँ मेहमान बनकर आते हैं।
पौराणिक कथा के अनुसार, राजा इंद्रद्युम्न की पत्नी रानी गुंडिचा भगवान जगन्नाथ की परम भक्त थीं। उनकी कठोर भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें एक वचन दिया था।
भगवान जगन्नाथ ने रानी गुंडिचा को वचन दिया था कि वे हर साल आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को उनके घर जन्मवेदी जरूर आएंगे। इसी वादे को निभाने वे हर साल यहाँ आते हैं।
भगवान जगन्नाथ इस यात्रा पर अकेले नहीं जाते। वे बड़े भाई बलभद्र और छोटी बहन सुभद्रा के साथ तीन अलग-अलग भव्य रथों में सवार होकर निकलते हैं।
मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ अपनी पत्नी माता लक्ष्मी को मुख्य मंदिर में ही छोड़ आते हैं, जिससे नाराज होकर वे रथ यात्रा के पांचवें दिन हेरा पंचमीगुंडिचा मंदिर उनका रथ तोड़ने आती हैं।